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Showing posts from May, 2020

Human rise

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May humans rise through education.  वर्तमान समय में विभिन्न तरह के समाज में गलत शिक्षा का प्रचार ज्यादा होने की वजह से जैसे कि अभिनेता अभिनेत्रियों के द्वारा अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए बनाई गई वर्तमान फिल्में में अश्लीलता दिखाई जाती है इसके कारण वर्तमान युवा पीढ़ी को नर्क में धकेला जा रहा है।  जिस तरह के वर्तमान अभिनेता अभिनेत्रियां अर्धनग्न बदन कपड़े पहनते हैं। जो हम सब जानते हैं कि इनके कपड़े किस तरह के होते हैं हमें बताने की जरूरत नहीं है।                                                          जिन को देखते हुए वर्तमान के युवा युवतियां भी उनकी अश्लीलता को देखते हुए इस तरह के कपड़े पहनने लगते हैं जिस तरह समाज में एक खतरा पैदा हो रहा है तथा उनका माता पिता के प्रति आदर सम्मान भाव कम होता जा रहा है।                                   ...

गलत शिक्षा का शिकार वर्तमान युवा ।

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   हॉलीवुड का गलत प्रभाव                                      बॉलीवुड आज हम इसे एक महत्वपूर्ण मनोरंजन का साधन के रूप में मानते है बॉलीवुड का नाम आते ही हमारे दिमाग की सुई फिल्मों की तरफ से जाती है उन अभिनेता और अभिनेत्रियों की तरफ से जाती है जो हमारे पसंदीदा है और जिन्हें हम फिल्मों में देखते है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है  बॉलीवुड की क्या हानियां हैं या हम यूं कहें कि जो फिल्मे बन रही है उनसे हमारे हमारे परिवार को,समाज को, हमारे विश्व को क्या हानियां हो रही ? चलिए आज हम इन्हीं हानियों पर कुछ चर्चा करते हैं सबसे पहले हम देखते हैं कि जो हमारे समाज में शराब धूम्रपान आदि नशा करने का जो दौर चला है वह फिल्मों के कारण ही चला है हमारे घर में हमारे समाज में आज जो हमारे बच्चे फिल्में देखकर सीखते हैं शराब पीना धूम्रपान करना आदि यह सभी फिल्मों की ही देन है फिल्मों के कारण है हमारे समाज में यह सभी बुराइयां घर करती जा रही हैं नशे के कारण आज परिवार के परिवार बर्बाद हो रहे हैं एक व्यक्ति ज...

Who is the true god.

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Who is the true god.   Evidence in the holy Vedas प्रमाण -1. पवित्र यजुर्वेद अध्याय 29 मंत्र 25-  अनुवादः- आज अर्थात वर्तमान में शरीर रूपमहल में दुराचार पूर्वक झूठी पूजा में लीन मननशील व्यक्तियों को लगाई हुई आग अर्थात शास्त्र विधि रहित वर्तमान पूजा जो हानिकारक होती हैं, अग्नि जलाकर भस्म कर देती हैं ऐसे साधक का जीवन शास्त्र विरुद्ध साधना नष्ट कर देती हैं। उसके स्थान पर देवताओं के देवता पूर्ण परमात्मा सत्पुरुष की वास्तविक पूजा है। दयालु जीव का वास्तविक साथी पूर्ण परमात्मा के स्वस्थ ज्ञान अर्थात भक्ति को संदेश वाहक रूप में लेकर आने वाला तथा बोध कराने वाला आप कविर्देव अर्थात कबीर परमेश्वर कबीर है। भावार्थ:- जिस समय भक्त समाज को शास्त्र विधि त्याग कर मनमाना आचरण पूजा कराया जा रहा होता है । उस समय कविर्देव  (कबीर परमेश्वर) तत्वज्ञान को प्रकट करता है। प्रमाण-2. सामवेद अध्याय नंबर 4 खंड नंबर 25 का श्लोक नंबर 8 - अनुवादः- पूर्ण समर्थ कबीर देव अर्थात कबीर परमेश्वर विशाल शक्ति युक्त अर्थात सर्वशक्तिमान है तेजपुंज का शरीर मायावती बनाकर  प्रकट होक...

Creation of the universe

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According to God Kabir The first knowledge given by Kabir Parameshwar Ji was Anami Anami Lok.  Also called Akah Lok, the absolute God lived alone in that Anami ie ​​Akah Lok.  The real name of that God is Kavir Dev i.e. Kabir Parameshwara.  All souls were absorbed in the body of that perfect rich man.  This Kabir Dev's deputy matrimonial title is Anami Purush.  Purush means God.  Purna lord has created man in his own form, so man's name is also called man.  The light of a roman Samkhya of Anami Purush is more than the light of the Ankhya Sun.  For example, the name of the body of a respected Prime Minister of a country is different, and the title of the post is Tamak i.e. the name of the post is Prime Minister.  Many times the Prime Minister also keeps several departments with him, then whichever department documents he signs, he writes that post at that time.  For example, if the Home Ministry signs, the Home Minister w...

महाराणा प्रताप

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महाराणा प्रताप  परिचय:-  महाराणा प्रताप का जन्म विक्रम संवत 1597 जेष्ठ शुक्ल तृतीया रविवार 9 मई 1540 ईसवी को कुंभलगढ़ दुर्ग के कटार गढ़ बादल महल में हुआ। प्रताप महाराणा उदय सिंह का जेष्ठ पुत्र था उनकी माता का नाम जयवंता बाई (पाली नरेश अखेराज सोनगरा चौहान की पुत्री थी) महाराणा प्रताप का बचपन कुंभलगढ़ दुर्ग में ही व्यतीत हुआ। हाराणा प्रताप का विवाह 1597 ईस्वी में अजब्दे पवार के साथ हुआ जिनसे 16 मार्च 1559 ईस्वी में अमर सिंह का जन्म हुआ। महाराणा प्रताप 32 वर्ष की उम्र के थे तब उनके पिता उदय सिंह की होली के दिन 28 फरवरी 1572 ईस्वी को गोगुंदा में मृत्यु हो गई। उदयसिंह को गोगुंदा में ही दाह संस्कार किया गया। यहां स्थित महादेव बावड़ी पर 28 फरवरी 1572 ईस्वी को मेवाड़ के सामन्तों एवं प्रजा ने प्रतापसिंह का महाराणा के रूप में राजतिलक किया ।